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श्राइना और सृष्टि की हिचकियाँ

जब आप किसी काम को करते हैं या किसी तरह का अध्ययन करते हैं तो उससे संबंधित बहुत सारी बातें और बहुत सारा ज्ञान ऐसा होता है जिससे आपका स्वतः ही मिलन आरंभ हो जाता है।  बहुत कुछ आपको दिखने लगता है, आपको अनुभव होने लगता है और आपके आस पास वैसा ही वातावरण बनने लगता है।  

स्पिरिचुवल हीलिंग या एनर्जी हीलिंग का अभ्यास करते करते कुछ समय बीता तो धीरे धीरे बहुत कुछ और भी जानने का अवसर मिला, कई और तरह के लोग, उनका अनुभव और कुछ लोगों की सेवा का भी अवसर प्राप्त हुआ।  समय के साथ साथ ध्यान, योगासन, मनोविज्ञान, पेंडुलम डाउसिंग, चक्र बैलेनसिंग, रेकी हीलिंग, कलर थेरेपी, मसाज थेरेपी, ऍरोमा थेरेपी, सूजोक, प्राणिक हीलिंग आदि के बारे में भी अध्ययन का अवसर मिला।  धीरे धीरे कुछ अंतर्दृष्टि विकसित होना प्रारंभ हुई।  

हमारे एक सीनियर संजीव सर (बदला हुआ नाम) एक बार अपना एक अनुभव सुना रहे थे जिसमें उनका मिलना किसी आध्यात्मिक महिला से हुआ था। उनके ऑफिस में कोई आध्यात्मिक कार्यक्रम हुआ था उसके अनुभव बहुत ही रोमांचक थे। संजीव सर किसी भी तरह के ऊर्जा संबंधित किसी सिस्टम का भाग कम से कम उस समय तक तो नहीं थे। जो अनुभव उन्होंने सुनाये वह सिर्फ उनके ही नहीं , एक साथ उनके कई सहकर्मियों के थे। उस समय उसका नाम तो उन्हें स्मरण नहीं था लेकिन मेरे लिये उन्होंने काफी ढूँढ ढाँढ़ कर उसी सिस्टम की एक पुस्तक की व्यवस्था की। उसे मैंने पढ़ा और उन्हें वापस कर दिया। बात आयी गयी हो गयी।  

कभी कभी हमारे जीवन में कुछ चीज़ें अकस्मात आती हैं, अपनी झलक छोड़ती हैं और विस्मृत हो जाती हैं। इस जीवन में, संसार में कुछ भी बस यूँ ही नहीं होता है; उसके पीछे नियति की कोई योजना होती है जो हमें बहुत बाद में समझ में आती है, और अक्सर तो हमें इस बात का कभी आभास भी नहीं होता है। कुछ ऐसा ही इस संबंध में हुआ था। उस पुस्तक तो बस यूँ ही पढ़ना, और उसका कुछ अंश याद रह जाना भविष्य में मेरे काम आया और इस छोटी सी दिखने वाली घटना ने मेरे आध्यात्मिक जीवन में एक बड़ा परिवर्तन किया। खैर, अभी इतना विस्तार में जाने की आवश्यकता नहीं है।  

एक दिन की बात है, श्राइना को काफी हिचकियाँ आ रही थीं, और वह काफी असुविधा महसूस कर रही थी। बहुत सारे घरेलू उपाय कर लिये गये और कई घंटे बीत गये, परन्तु कोई आराम नहीं मिला। मुझे एकाएक उसी पुस्तक का कुछ अंश याद आया जो मैंने संजीव सर के देने पर पढ़ी थी। जितना याद आया उसी हिसाब से मैंने कुछ उपाय किया। मुझे जहाँ तक याद है, शायद २-३ मिनटों में उसे पूरी तरह आराम मिल गया। उस दिन मैंने तय किया कि अब इस सिस्टम का भी अध्ययन करना है और इसे भी अपने जीवन में ले कर आना है।  

अभी ४-५ दिन पहले हिचकियों की उसी तरह की समस्या जैसी श्राइना को हुई थी वैसी ही सृष्टि को हुई। वह तो इसके पूरे मजे ले रही थी, लेकिन हमें बड़ी असुविधा हो रही थी। श्राइना की सहज गंभीरता के उलट सृष्टि कुछ ज़्यादा ही चंचल है, हिचकियों से श्राइना को जितनी परेशानी हो रही थी सृष्टि को उतना ही मज़ा आ रहा था। सृष्टि को हिचकी आये तो वो फिर ज़ोर ज़ोर से हँसे और हमें दूसरे कामों में और विशेष रूप से सोने में व्यवधान पैदा हो रहा था। फिर सृष्टि की हिचकियों के लिये वही उपाय किया गया तो करीब ३.५ साल पहले श्राइना के लिये किया गया था। कुल १-२ मिनटों में हिचकियाँ पूरी तरह से बंद हो गईं।  

आज उस सिस्टम का भाग बने हुए मुझे करीब ४० महीने हो चुके हैं। और इस समय काल में बहुत लोगों की सेवा का अवसर मिला। बहुत सारी सफलताएं मिलीं और असफलताएं भी। असफलताओं के कारणों का अध्ययन किया गया और धीरे धीरे सुधार भी आया।  

अभी के लिये बस इतना ही।  

आपके भीतर के परमात्मा को हृदय से प्रणाम।