ब्लॉग पुरालेख

प्रथम अनुभव

जब मैं इस सिस्टम में नया नया था, मुझे इस पर बहुत संशय था, मुझे स्वयं को ही विश्वास नहीं था इस सब प्रकार की बातों पर।  यहाँ तक कि मैंने अपने परिवार के सदस्यों से भी बोल रखा था कि मैं कुछ अलग सा करने की शुरुआत कर रहा हूँ, मुझे नहीं पता है, यह वास्तव में क्या है, काम करता है या नहीं और आगे कुछ करूंगा भी या नहीं।  मैं जो भी कर रहा हूँ मुझे करने देना, मुझे टोकना मत और मुझसे कुछ पूछना भी मत, जब मुझे समझ में आ जायेगा तो सबको समझा दूंगा।  कुछ समझ में आया तो ठीक नहीं तो मैं खुद ही इसे त्याग दूंगा।  थोड़ा बहुत पढ़ा लिखा हूँ, भला बुरा समझ सकता हूँ, थोड़ी बहुत खोज बीन भी कर सकता हूँ, कुछ गलत, अनावश्यक या मूर्खतापूर्ण तो करूंगा नहीं।  यह अलग बात है कि मुझे यह थोड़ा बहुत अजीब तो लग ही रहा था।  मतलब, अगर मैंने खुद इसका अध्ययन नहीं किया होता सिर्फ किसी से सुना होता तो संभवतया कभी विश्वास नहीं करता।    

आज इंटरनेट का समय है, आप बहुत कुछ ढूँढ सकते हैं, बहुत सारी वीडियोज़ देख सकते हैं, बहुत सारे लेख पढ़ सकते हैं, और थोड़ा सा दिमाग लगा कर किसी निष्कर्ष तक पहुँच सकते हैं।  कुछ दिन बीतने के बाद मुझे याद आया कि मैंने इसी विषय पर वर्ष १९९४-९५ में एक पुस्तक पढ़ी थी, जो मेरे पास अभी भी होनी चाहिये।  बस फिर क्या था, सबको लगा दिया उस विशेष पुस्तक को ढूँढने पर।  पुस्तक मिल भी गयी, और पढ़ने पर पता चला कि जिस सिस्टम को मैं नया समझ रहा था, उस पर आश्चर्य और संशय कर रहा था उसे मैं स्वयं इतने वर्षों पहले पढ़ चुका था।  परन्तु संभवतया वह समय सिर्फ प्रस्तावना भर के लिये था।  खैर अब विश्वास दृढ़ होना प्रारंभ हुआ।   

यह सब अध्ययन चल ही रहा था, कुछ दीक्षाएं भी सम्पन्न हुईं; परन्तु सिवाय अपने, कभी किसी पर इसका प्रयोग नहीं किया था, और बिना प्रयोग के तो परिणाम पता चलना नहीं था।  अब समय आ गया था कि मैं यह जो कुछ भी कर रहा था उसे अपने निकट संपर्क के लोगों में घोषित करने का, प्रतीक्षा थी तो बस उचित अवसर और घटना की।  

एक दिन सर्दियों की शाम की बात है, स्वाति (बदला हुआ नाम) ने मुझसे बताया कि उसे कंधे में बहुत ज़्यादा दर्द है और कोई भी काम करना बहुत ही मुश्किल हो रहा है।  विस्तार से बातचीत करने पर पता चला कि फ्रोज़न शोल्डर की समस्या है।   

यह समस्या आमतौर पर धीरे धीरे पैदा होती है और ठीक होने में भी काफी समय, कभी कभी २ साल तक लग जाते हैं।  इस समस्या में कंधों में जकड़न और जोड़ों में काफी दर्द होता है।   इलाज के लिये जोड़ों में कॉर्टिकोस्टीरॉयड्स के इन्जेक्शन दिये जाने आवश्यकता भी पड़ सकती है, और बहुत ज़्यादा गंभीर होने पर सर्जरी भी करवानी पड़ सकती है।  

हमें इसके बारे में इतना नहीं पता था, और न जानने की आवश्यकता थी।  हमारे लिये तो दर्द का निवारण ही काफी था उस समय के लिये।  रात में सर्दियाँ अधिक थीं, बाहर जाने की इच्छा नहीं हो रही थी और समय भी अधिक हो गया था।  मुझे लगा शायद यही अवसर है कि अब इसका प्रयोग किया जाय।  मैंने बताया कि  मैं कुछ सीख रहा हूँ, मुझे यह तो नहीं पता कि कितना काम करेगा लेकिन एक बार कोशिश करते हैं।  उम्मीद थी कि लगभग २० मिनट लगेंगे इस क्रिया में।  हमने आपसी सहमति से तय किया कि इस सिस्टम में बताई गई विधि को अपनाते हैं, और हमने ऐसा ही किया।  २० मिनटों के बाद आश्चर्यजनक रूप से लगभग ७०% आराम मिल गया था, अगली दोपहर तक सारा का सारा दर्द लगभग ठीक हो गया था।  बाद में कुछ दिनों तक कुछ खास तरह की कसरतें ज़रूर की थी, जिससे की इस तरह की समस्या की संभावना को कुछ कम किया जा सके।  और इसके अलावा, इस समस्या के लिये हमने कभी किसी भी प्रकार का इलाज या दवाइयाँ नहीं अपनाईं और न ही यह दर्द दुबारा कभी हुआ। 

यह मेरे साथ घटी अपने आप में पहली घटना थी और इस घटना ने इस सिस्टम पर हमारा विश्वास बहुत अधिक बढ़ा दिया।  

अभी के लिये बस इतना ही।  

आपके भीतर के परमात्मा को हृदय से प्रणाम।