अहंकार का विसर्जन

करने वाला वही और कराने वाला भी वही है।  उसके हाथ हजार हैं जबकि तुम तो उसके ‘हाथ’ भर हो।  तुम तो बांस की पोली पोंगरी हो।  जो स्वर निकल रहा है, जो ध्वनि निकल रही है, जो संगीत निकाल रहा है वह उसी का है।  लेकिन यह संभव तभी हो सकता है जब अहंकार का विसर्जन होना शुरू हो जाए।  गीता, कुरान, बाइबल का सार अमृत तत्व एक ही है अहंकार का विसर्जन।  अहंकार से मुक्ति ही धर्म है।

झुकना आसान नहीं है

जब तक सद्गुरु जीवित हैं तब तक तुम उसमे भगवान की अनुभूति करने में समर्थ नहीं हो पाते हो।  जब गुरु जिंदा होता है तब तुम उसकी संभावना नहीं देख पाते हो।  लेकिन जब गुरु पूर्ण हो जाता है, शरीर त्याग देता है, तब तुम मूर्ति बनाकर उसकी पूजा करते हो।  वह पूजा निरर्थक है।  सद्गुरु जिंदा है, उसमे परमात्मा की सद्भावना करो, उसमे परमात्मा को देखो।  वही सद्गुरु साक्षात अनंत ऊर्जा को तुम्हारे भीतर प्रवाहित कर देगा।  यही आध्यात्म का विज्ञान है।  मेरे प्रेमियों, मूर्ति के सामने तुम झुक जाते हो बड़े आराम से क्योंकि तुम्हारे अहंकार को चोट नहीं लगती है।  तुम सोचते हो कि यह तो मूर्ति है, सब इसके सामने झुक रहे हैं।  मूर्ति के सामने झुकना बहुत आसान हो जाता है।  लेकिन जीवंत गुरु के सामने झुकना कठिन हो जाता है, क्योंकि अहंकार को थोड़ा चोट पहुँचती है।  झुकना आसान काम नहीं है।  दुनिया में सबसे कठिन काम झुकना है।  तुम सोचते हो कैसे झुकें इस आदमी के सामने जो मेरे जैसा ही तो है।  लेकिन झुके बिना दुनिया में कुछ मिलता नहीं है।  न तो इस जगत में और न ही उस जगत में।  इसीलिए गुरु सबसे पहले झुकने की कला सिखाता है तुम्हें।  अहंकार का विसर्जन करने की कला सिखाता है।

गुरु को चुन पाना बड़ा कठिन काम है।  बहुत से प्रेमी मुझसे पूछा करते हैं कि किसको गुरु मान लिया जाय।  मैं कहना चाहता हूँ कि गुरु का चयन कर पाना तुम्हारे लिये सम्भव नहीं है।  गुरु का चयन करने तुम चलोगे तो अपनी बुद्धि से ही चयन करोगे।

जिसका चयन करने तुम जा रहे हो, उसके बारे में निर्णय करोगे कि इसका आचरण ठीक है, इसकी वाणी ठीक है, इसका चाल चलन ठीक है या नहीं।  यानि तुम अपनी बुद्धि से गुरु के व्यक्तित्व का फैसला करोगे।  शिष्य अपने गुरु के व्यक्तित्व का निर्णय नहीं ले सकते है।  पहले ही चरण में विरोधाभास हो गया।  जब तुम अपने संस्कारों के मुताबिक अपनी बुद्धि का प्रयोग करोगे तो गुरु का चयन नहीं कर पाओगे।  जैसा कि अगर तुम जैन परिवार में पैदा हुए हो तो किसी ऐसे आदमी को ही गुरु मानने को तैयार होगे जो सूरज के डूबने से पहले ही खाना खा लेता हो।

अपनी बुद्धि की कसौटी से, अपने संस्कारों की कसौटी से गुरु को खोजोगे तो गुरु नहीं मिलेगा।  तुम गुरु का चयन नहीं कर सकते हो।  तुम केवल उपलब्ध रहो और उनके सान्निध्य में रहो।  तुम उनके साथ सत्संग करो, उनकी सुनो, उनके समीप जाओ।  उठते-बैठते, सुनते-सुनते सान्निध्य प्राप्त करते-करते तुम्हें ऐसा लगेगा कि तुम्हारा हृदय उस गुरु की ओर खींचता चला जा रहा है।  वह गुरु तुम्हारे हृदय पर छाने लगेगा और प्रेम घटित हो जाएगा।  तुम्हारे पैर अपने आप उसी गुरु की ओर बढ़ते चले जाएंगे और गुरु की कसौटी यही है।  जिस गुरु के सान्निध्य में रहने से तुम्हारे भीतर शांति व आनंद की बंसी बजने लगे वही तुम्हारा सद्गुरु है।  सद्गुरु तुम्हें स्वयं चुन लेता है।  तुम्हें केवल उपलब्ध रहना चाहिए।

कम प्रयासों से अधिक की प्राप्ति

बहुत समय से पुराने लोग इस भ्रम में थे कि जीवन से और अधिक प्राप्त करने या जीवन में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त करने के लिये हमें कठिन मेहनत करनी होगी, अपने व्यावसायिक जीवन को और अधिक समय और ऊर्जा देनी होगी और हर तरह का बलिदान देना होगा।  तथापि, रिचर्ड कोच ने पता लगाया कि यह निष्कर्ष गलत है।  उन्होने यह सिद्ध किया कि किस तरह जीवन के हर क्षेत्र में “कम प्रयासों से अधिक की प्राप्ति हो सकती है”।  वे कहते हैं, आनंद, ज़्यादा के लिए प्रयास करने से नहीं कम के लिए करने से प्रवाहित होता है।  अधिक की प्राप्ति के लिए काम कम करो।  यह सिर्फ उन चीजों पर जो कि वास्तव में महत्त्वपूर्ण हैं ध्यान देकर प्राप्त किया जा सकता है।  इसके लिए, अपने सिर्फ सबसे बेहतरीन 20 प्रतिशत पर ध्यान केन्द्रित रखिए।  यह दावा “80/20 सिद्धान्त” की जबर्दस्त खोज पर आधारित है।

यू कैन टॉप

आपमें स्वयं को परिभाषित करने की परम शक्ति है।  आपका भूत कभी आपके वर्तमान या भविष्य का निर्धारण नहीं कर सकता है।  इसलिये आज से ही अपनी नयी शक्तिशाली पहचान का दावा शुरू कीजिये।  लिखना शुरू कीजिये कि आप क्या बनना चाहते हैं।  और मेरा विश्वास कीजिये, आप जो भी चाहें बन सकते हैं और अपनी पहचान आप बदल सकते हैं सिर्फ इसे करने का निर्णय लेकर।  निर्णय लीजिये, सोचना शुरू कीजिये, अनुभव कीजिये और जैसा आप बनना चाहते हैं वैसे होने का अभिनय  कीजिये।  जल्दी ही एक चमत्कार होगा:  आप वही व्यक्ति बन जाएंगे। 

गाज़ियाबाद में गुरुपूर्णिमा महोत्सव सम्पन्न

कल गुरुपूर्णिमा का महोत्सव गाज़ियाबाद धाम पर आयोजित किया गया था। मुझे भी इस अवसर पर उपस्थित रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। झुग्गी झोपड़ी शिक्षा सेवा मिशन के बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए कार्यक्रम बड़े ही मनोहारी थे। उनके द्वारा और उनके ऊपर संस्थान द्वारा की गयी मेहनत साफ दिख रही थी। हम लोग तो वहाँ सिर्फ कुछ घंटों के लिए ही गए थे परन्तु संचालक और सेवादार सुबह से ही तैयारियों में लगे हुए थे। कई घंटों की कड़ी मेहनत के बाद की स्वाभाविक थकान, खिन्नता और शिकन का कहीं कोई नामो-निशान तक नहीं था। यह अगर संभव हुआ था तो मात्र साक्षी श्री के सान्निध्य की वजह से। अपने भक्तों, अनुयायियों और शिष्यों से मिलकर साक्षी श्री को जो खुशी मिलती है वह भी साफ झलक रही थी साक्षी श्री के चेहरे पर।

साक्षी श्री ने छात्रों को ध्यान में रखकर “यू कैन टॉप” नामक एक पुस्तक लिखी थी जो कि हर एक छात्र को अवश्य पढ़नी चाहिए। इसमें स्वस्थ तन, स्वस्थ मन और आत्म-बोध के लिए बहुत ही सरल, वैज्ञानिक तकनीकियाँ समझाई गयी हैं जिनके अभ्यास से जीवन में महान सकारात्मक परिवर्तन लाए जा सकते हैं। इस पुस्तक की लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए गुरुदेव की इच्छा थी कि इसका हिन्दी संस्करण भी बनाया जाय।

मेरे सौभाग्य और गुरुदेव के आशीर्वाद से यह कार्य करने का सुअवसर मुझे प्राप्त हुआ। पुस्तक का सरल हिन्दी में अनुवाद पूरा हो चुका है और अब यह बहुत शीघ्र ही पाठकों के लिए उपलब्ध होगी।

– अजय प्रताप सिंह

डर और चिंता

क्या आप किसी चीज से डरते हैं और उस पर काबू पाना चाहते हैं? याद रखिए डर किसी भी तरह के खतरे की जीव-वैज्ञानिक प्रतिक्रिया है।  इसके लक्षण हैं तनाव, कमजोरी, पेट में खालीपन आदि। अगर खतरा ऐसे कोई लक्षण प्रकट नहीं करता है तो या तो व्यक्ति खतरे के प्रति उदासीन है या फिर “चिंतित” है लेकिन डरा हुआ नहीं।  इससे कोई कैसे निपटता है यह दो कारकों पर निर्भर है: डर की तीव्रता और व्यक्ति की आंतरिक इच्छाशक्ति।  यदि आप किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहते हैं तो ऐसी भावनाओं से आपका कभी सामना नहीं होगा।  डीप ब्रीदिंग, पावर स्लीप और महा मेधा क्रिया ये सभी डरों से बाहर निकलने में आपकी मदद करती हैं क्योंकि ये आपको स्थिति का विश्लेषण करने और जीतने के लिए उपयुक्त रणनीति विकसित करने का अवसर देती हैं।

जल्दी सीखने का अभ्यास

क्या आपने कभी ध्यान दिया है, आपके आप-पास के सफल लोग कौन सी आदतें धारण करते हैं? जिस प्रकार वे बात करते हैं, चलते हैं, अलग-अलग उम्र के लोगों से कैसे संवाद करते हैं उसकी एक सूची बनाने की कोशिश कीजिये और क्यों न उन्हीं से सलाह लें कि आपको किस तरह से व्यवहार करना चाहिये, काम करना चाहिये, अध्ययन करना चाहिये और जीना चाहिये; वे अपने रहस्यों को आपसे बांटने में प्रसन्न ही होंगे।

कुछ भी जल्दी सीखने का सबसे अच्छा तरीका है कि जो आप सीखना चाहते हैं उसका पूर्वदर्शन कीजिये। फिर यह समझने का प्रयास कीजिये कि उस विषय पर किस प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं,  यह जानने के बाद पाठ्य सामग्री और अपने नोट्स को पढ़ने का प्रयास कीजिये।  अंततः, आपने जो पढ़ा है उसका स्वयं अनुवाचन कीजिये और बीच में आप जो भूल गए हैं उसकी जाँच कीजिये।  इस अंतर को दूर करके आप एक आत्मविश्वासी शिक्षार्थी बन सकते हैं।

उद्धरण: ‘यू कैन टॉप’ पुस्तक

शक्तिशाली श्वशन (पावर ब्रीदिंग) काफी प्रभावकारी है!

अपनी एकाग्रता को बढ़ाने और तनाव स्तर को कम करने के लिये, योगी और कुशल लोग इसी प्रकार की पावर ब्रीदिंग की सलाह देते हैं।  इस सलाह के पीछे रहस्य यह है कि श्वसन आपके शरीर को प्रचुर मात्र में प्राणवायु (ऑक्सिजन) प्रदान करता है और अंततः यह प्राणवायु मस्तिष्क तक पहुँच कर इसे सक्रिय और ऊर्जावान बनाती है।  पावर ब्रीदिंग कहीं भी की जा सकती है और यह क्षात्रों के लिये सर्वोत्तन व्यायाम मानी गयी है।

पावर ब्रीदिंग के लिये, सुखपूर्वक बैठ जाइए और अपनी नासिका से धीरे-धीरे गहरी सांस लीजिये और अपने पेट को अंदर खींचते हुए सांस को बाहर निकालिये।  इस कार्य को बिना किसी जल्दबाज़ी के 10 बार करना है।

उद्धरण:  “यू कैन टॉप” पुस्तक

आस्था और आकर्षण

आस्था इतनी शक्तिशाली है कि यह घटनाओं और आपकी मनोवांछित परिस्थितियों को आपके जीवन में आकर्षित करने के लिये प्रयोग की जा सकती है।  आस्था का अभाव आपके मस्तिष्क में उन विचारों को उत्पन्न करेगा जो आपकी उन इच्छित घटनाओं जिनका कि आप आकर्षण करना चाहते हैं उनके विपरीत होगा।  उदाहरण तया, आपकी करोड़पति बनने की इच्छा हो सकती है, लेकिन आप ईमानदारी से यह विश्वास नहीं कर पाते हैं कि आप अपनी वर्तमान परिस्थितियों में इसे इतनी शीघ्रता से प्राप्त कर सकते हैं।  दृढ़ आस्था के अभाव में आपकी सभी इच्छाएं एवं लक्ष्य व्यर्थ हैं।

अपने लक्ष्य को वास्तविकता में बदलने के लिये आपको अपने भीतर प्रबल विश्वास करने की दृढ़ इच्छा शक्ति विकसित करनी होगी।  कोई भी व्यक्ति अपने आस्था तंत्र को सकारात्मक रूप से बढ़ना और दिन प्रतिदिन शक्तिशाली होना सिखा सकता है।  शुरुआत आप एक ऐसे लक्ष्य से कर सकते हैं जिस पर आपको विश्वास हो कि यह प्राप्त करना संभव है।  प्रारम्भ में शून्य से करोड़पति बनना बहुत अधिक लग सकता है, लेकिन लखपति बनने का लक्ष्य बनाना संभावना के क्षेत्र में लगता है।  आप इस लक्ष्य को प्राप्त करने में आस्था रखिये और आप देखेंगे कि किस तरह आकर्षण का नियम आपके लिये कार्य करता है।

उद्धरण: “यू कैन टॉप” पुस्तक।

आकर्षण का नियम

“सिर्फ बहुत कम लोग विचार करते हैं, उनमें से ज़्यादातर सोचते हैं कि वे विचार करते हैं लेकिन इस पृथ्वी पर ज़्यादातर लोग विचार करने के विषय में सोचते तक नहीं हैं”।

उद्धरण: यू कैन टॉप पुस्तक।