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Category Archives: प्रवचन

प्रेम और प्रार्थना

जब आप प्रेम करोगे तो अद्भुत शांति आपके चित्त में व्याप्त होने लगेगी। बिना प्रेम के चित्त में शांति नहीं आ सकती है, बिना शांति के जीवन तनावमुक्त नहीं हो सकता है, और तनाव मुक्त हुए बिना कोई पूजा प्रार्थना संभव ही नहीं हो सकती है। …

अपनी अंतरात्मा से निकले शब्द ही ईश्वर के प्रति असली प्रार्थना है। …

प्रार्थना जीवन का विज्ञान है, और उस विज्ञान को प्राप्त करने के लिये कला चाहिए। …

प्रार्थना सीखी नहीं जाती, प्रार्थनाएं सीखने की कोई आवश्यकता नहीं है। प्रार्थना तो आप अपने आप सीख जाते हो वैसे ही जैसे प्रेम सिखाया नहीं जाता है, आप प्रेम करना अपने आप सीख जाते हो। वैसे ही आप प्रार्थना सीख जाओगे। …

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पाप और पुण्य

पाप और पुण्य की मैं एक ही परिभाषा करता हूँ कि तुम जिस कृत्य में पूरी पूरी ऊर्जा के साथ उतर गए वो पुण्य कृत्य हो गया।  अगर किसी को आपने पूरा-पूरा प्रेम किया तो वो पुण्य कृत्य हो गया।  और अगर आपने अधूरा-अधूरा कार्य किया तो वह पाप कृत्य हो गया।  सन्यासी मैं उसी को कहता हूँ जो प्रतिपल जी रहा है, वर्तमान में जी रहा है, पूरी ऊर्जा से जी रहा है।  जहाँ है, जैसे है उसी में जी रहा है।  लेकिन तुम हमेशा भविष्य में जीते हो, भविष्य में उलझे रहना तुम्हारे समस्त दुखों का कारण बन जाता है।

सद्गुरु साक्षी राम कृपाल जी
द गुरु पत्रिका, जुलाई २०१२ अंक

आपकी कल्पना, आपकी इच्छा शक्ति से कई गुना अधिक शक्तिशाली होती है।  दृष्टा भाव का अभ्यास अपने जीवन के एक महत्त्वपूर्ण पहलू के रूप में करें, अर्थात जो कुछ भी आप सोचें उसका मानसिक चित्र बनाकर अभ्यास करें।

प्रतीक्षा मत करो

प्रतीक्षा मत करो; समय कभी भी “पूरी तरह उचित” नहीं होगा।  जहाँ खड़े हो वहीँ से शुरू करो और तुम्हारे नियंत्रण में जो भी उपकरण हैं उनसे काम करो।  और मैं तुम्हें भरोसा दिलाता हूँ कि जैसे-जैसे तुम आगे बढ़ते जाओगे ‘और बेहतर’ उपकरण मिलते जायेंगे।

रचनात्मकता का विस्फोट

रचनात्मकता, किसी विषय की अपनी व्याख्या को विश्लेषित एवं प्रचलित करने की आपकी योग्यता है.

उदहारणतया, यदि पांच बच्चे किसी मानव का चित्र बनायें तो उन सबका अपना-अपना अलग तरीका होगा।  कुछ उसमें सीधी लकीरें ही खींचेंगे तो कुछ उसमें और विस्तार देंगे।  यहाँ रचनात्मकता को बेहतर बनाना सिर्फ चित्र को बेहतर बनाना ही नहीं है; यह आपकी कल्पना के साथ आपकी बेहतर समझ की शक्ति को उन्मुक्त करना है।  इसलिए यहाँ पर कुछ बातें हैं जो मैं चाहता हूँ कि आप आपने मष्तिष्क में धारण करें:

  • आप जो भी करें उत्साह के साथ करें। उत्साहहीन न बनें। यह आपकी रचनात्मकता के फलने-फूलने के लिये अति आवश्यक है।
  • पिछली नाकामियों या भविष्य में आने वाले किसी परिणाम की उम्मीद से परेशान न हों।  जब आपकी समस्त ऊर्जा भूत और भविष्य से निकल आती है तो आपके भीतर ऊर्जा का एक जबरदस्त विस्फोट होता है।  यह ऊर्जा का विस्फोट रचनात्मकता कहलाता है।
  • समस्त रचनात्मकता एक प्रकार का खेल है। खेल की तरह इसका आनंद लें। गंभीर लोग किसी प्रकार की रचना नहीं कर सकते।  उनका पूरा जीवन गंभीर बने रहने में ही बीत जाता है। इसलिए हर समय खिलाड़ी बने रहना सीखिए। रचनात्मकता उनके अन्दर आती है जो सदैव सरल, कोमल और स्वाभाविक रहते हैं। वे जो करते हैं वही एक रचनात्मक घटना बन जाती है।
  • यह वैज्ञानिक रूप से स्थापित और स्वीकार किया जा चुका है कि जब कोई मनुष्य भीतर से आनंदित या प्रेरित अनुभव करता है तो इसके साथ ही उसके मष्तिष्क की ओर ऊर्जा का ऊर्ध्वगामी प्रवाह होता है। यदि वह खिन्न या हतोत्साहित अनुभव करता है तो इसके अनुरूप ही वह ऊर्जा का अधोगामी प्रवाह भी अनुभव करता है। जब किसी की ऊर्जा का प्रवाह ऊर्ध्वगामी होता है उसी समय बुद्धिमत्ता का विस्फोट होता है।
  • क्षात्रों के लिये महा मेधा क्रिया ध्यान की एक अति उत्तम युक्ति है क्योंकि यह स्मरण शक्ति की वृद्धि, बुद्धिमत्ता, रचनात्मकता, एकाग्रता एवं आत्मविश्वास को बढ़ाती है। यह क्रिया तनाव और चिंता के स्तर को घटाने में मदद करती है और जबरदस्त ऊर्जा के निस्तार को सुगम करती है क्योंकि जो ऊर्जा तनाव और चिंता में फंसी हुई थी अब वो वहां पर नहीं है।  अब यह आपके लिये उपलब्ध है और अब आप और बेहतर रचना कर सकते हैं।
  • मानव ऊर्जा को रचनात्मकता की तरफ मोड़ने का महत्तम स्रोत प्रेम है।  जितना अधिक आप प्रेमपूर्ण होंगे उतना ही अधिक आपकी ऊर्जा रचनात्मक दिशा में प्रवाहित होने लगेगी।
  • अंततोगत्वा, स्वयं की खातिर ऐसा कुछ खोजिये जिसका आप सुविधापूर्वक, आसानी से एवं अनायास ही आनंद ले सकें। अपने  लिये कुछ रचनात्मक शौक जैसे पेंटिंग, ड्राइंग आदि चुनें।

ऊपर लिखी हुई बातों का अनुसरण करें और अपनी रचनात्मकता का विस्फोट स्वयं अनुभव करें।

महामेधा क्रिया की अधिक जानकारी के लिये यहाँ क्लिक करें।

इच्छा ही प्रारब्ध है

यह आपकी सबसे गहरी इच्छा है जो मूर्त रूप लेती है:
जैसी आपकी इच्छा है वैसा आपका प्रयोजन है
जैसा आपका प्रयोजन है वैसी आपकी भावना है
जैसी आपकी भावना है वैसे आपके कर्म हैं
जैसे आपके कर्म हैं वैसा आपका प्रारब्ध है
यह जानना हमारे लिये अति महत्त्वपूर्ण है कि हम वास्तव में चाहते क्या हैं और फिर हमें उसके लिये प्रयास करना चाहिये …

यह विश्वास रखें कि जिस भी चीज की आपने तीव्रता से इच्छा की है वह अवश्य फलीभूत होगी।  यदि मौजूदा परिस्थितियों में यह असंभव भी लगे तो आप निश्चिंत रहें।  आपने आप में विश्वास और श्रद्धा रखें, नियति आपके इच्छित फलों के लिये अवसर और परिस्थितियां स्वयं उत्पन्न कर देगी।