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Category Archives: उद्धरण

आकर्षण का नियम

“सिर्फ बहुत कम लोग विचार करते हैं, उनमें से ज़्यादातर सोचते हैं कि वे विचार करते हैं लेकिन इस पृथ्वी पर ज़्यादातर लोग विचार करने के विषय में सोचते तक नहीं हैं”।

उद्धरण: यू कैन टॉप पुस्तक।

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प्रतीक्षा मत करो

प्रतीक्षा मत करो; समय कभी भी “पूरी तरह उचित” नहीं होगा।  जहाँ खड़े हो वहीँ से शुरू करो और तुम्हारे नियंत्रण में जो भी उपकरण हैं उनसे काम करो।  और मैं तुम्हें भरोसा दिलाता हूँ कि जैसे-जैसे तुम आगे बढ़ते जाओगे ‘और बेहतर’ उपकरण मिलते जायेंगे।

इच्छा ही प्रारब्ध है

यह आपकी सबसे गहरी इच्छा है जो मूर्त रूप लेती है:
जैसी आपकी इच्छा है वैसा आपका प्रयोजन है
जैसा आपका प्रयोजन है वैसी आपकी भावना है
जैसी आपकी भावना है वैसे आपके कर्म हैं
जैसे आपके कर्म हैं वैसा आपका प्रारब्ध है
यह जानना हमारे लिये अति महत्त्वपूर्ण है कि हम वास्तव में चाहते क्या हैं और फिर हमें उसके लिये प्रयास करना चाहिये …

यह विश्वास रखें कि जिस भी चीज की आपने तीव्रता से इच्छा की है वह अवश्य फलीभूत होगी।  यदि मौजूदा परिस्थितियों में यह असंभव भी लगे तो आप निश्चिंत रहें।  आपने आप में विश्वास और श्रद्धा रखें, नियति आपके इच्छित फलों के लिये अवसर और परिस्थितियां स्वयं उत्पन्न कर देगी।