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Category Archives: उद्धरण

मनुष्य शरीर और आत्मा का जोड़ है

मनुष्य शरीर और आत्मा का जोड़ है।  शरीर के लिए बहुत जरूरी है भौतिक सुख-समृद्धि की ऊंचाइयों पर होना।  पर आत्मा के लिए बहुत जरूरी है भीतर से परम शांति, परम आनंद की अवस्था को उपलब्ध करना।  आत्मा को भूखा नहीं रखा जा सकता, आत्मा भूखी रह गयी तो जीवन नरक हो जायेगा और चाहे जितनी धन सम्पदा आपके पास हो और सिर्फ आत्मा को स्वस्थ करने में लगे रहे, शरीर और भौतिक दिशाओं में ध्यान नहीं दिया तो दीनता, दरिद्रता, अपंगता की स्थिति को उपलब्ध हो जाएंगे।  भौतिक जीवन और भीतर की शांति और आनंद को उपलब्ध करने वाला आध्यात्मिक जीवन कैसे मिले इसीलिए मैंने गीता, क़ुरान, बाइबिल, धम्मपद और दुनिया के जीतने संबुद्ध पुरुषों ने अपनी खोज, अपनी तलाश के द्वारा अभिव्यक्तियाँ दी थी सबको गहरे में तलाशा, गहरे में खोजा तो जिस निष्कर्ष पर निकला उसे मैंने साइन्स डिवाइन के तीन महामंत्रों के माध्यम से दुनिया को अर्पित करने की चेष्ठा की।  अगर ये तीन महामंत्र आपके प्राणों में उतार जायें तो गीता, क़ुरान, बाइबिल से लेकर पृथ्वी पर अब तक जो भी धर्म, आध्यात्म, और मनोविज्ञान के क्षेत्र में भौतिक और आध्यात्मिक दिशा में प्रगति करने के लिये आवश्यक है सब समाहित हो जाता है, सब प्रकट हो जाता है।  तो कहीं से आप शुरू कर सकते हैं, पहुंचेंगे वहीं।  पर तीनों महामंत्र आपके प्राणों में आत्मसात हो जायें इसके लिये सिर्फ तीन महामंत्रों की समझ ही पर्याप्त है।  अगर आपको इनकी समझ आ गयी तो इनकी समझ का परिणाम होता है की धीरे-धीरे आपके भीतर का रसायन बदलने लगता है और आपके इस जीवन में जो होने लायक है वो होना शुरू हो जाता है, जो छूटने लायक है वो छूटता चला जाता है।

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आकर्षण का नियम 2

हर विचार एक कारण है और हर कार्य या उत्पन्न परिस्थिति उसका परिणाम मात्र है। इस विश्व में विचार ही सबसे महत्त्वपूर्ण, रहस्यपूर्ण और अदृश्य, जीवित मौजूद शक्ति है। विचार बिलकुल जीवित वस्तुओं की तरह हैं। बाहरी सफलता भीतर की सफलता से ही प्रारम्भ होती है और यदि वास्तव में गंभीरतापूर्वक अपने वाह्य जीवन की गुणवत्ता को सुधारना चाहते है, तो आपको पहले अपने आंतरिक जीवन को सुधारना होगा। मस्तिष्क में छुपी हुई असीमित क्षमताओं को खोजना सीखने और इसके प्रभावी प्रयोग से, जो आप बनना चाहते हैं वह बनने और जीवन में असाधारण सफलता प्राप्त करने से महत्त्वपूर्ण कुछ भी नहीं है।
आकर्षण का नियम, ब्रह्माण्ड का प्रकृतिक नियम है। इसके अनुसार, “लाइक अट्रैक्ट्स लाइक” यानि जब आप किसी विशेष विचार पर ध्यान केन्द्रित करते हैं तो आप उसी तरह के अन्य दूसरे विचारों को अपनी ओर आकर्षित करना प्रारम्भ कर लेते हैं। विचारों में चुम्बकीय शक्ति है और वे अपनी विशेष आवृत्ति (फ्रिक्वेन्सी) पर काम करते हैं। अतएव, वे उस फ्रिक्वेन्सी पर कार्य कर रहे अन्य सभी समान विचारों आकर्षित करना और आपको सर्वथा प्रभावित करना प्रारम्भ कर देते हैं। आप ब्रह्माण्ड के सबसे शक्तिशाली संचरण मीनार (ट्रांसमिसन टावर) हैं। यह आप पर निर्भर करता है कि आप नियति को क्या संदेश देना और उससे क्या प्राप्त करना चाहते हैं।

समझ ही समाधान है

आज सारा संसार एक गाँव की तरह हो गया है आज यहाँ बात करो सारी दुनिया में पहुँचती है।  आज आपके पास अणु शस्त्र है अगर आप मिटकर रहोगे, विभाजित रहोगे तो लड़ोगे और लड़ोगे तो निश्चित रूप से युद्ध संभव होगा।  अब अगर युद्ध होगा तो केवल एक देश नहीं मिटेगा, फिर सारी दुनिया मिट जायेगी; इसलिए मैं कहता हूँ कि अब तीसरा विश्व युद्ध असंभव हो गया है तीसरा विश्व युद्ध हो ही नहीं सकता।  अब सिर्फ आतंकवाद ही पनपेगा, बढेगा।  अगर इसको जड़ से मिटाने की कोशिश नहीं की गयी तो पहले समझ पैदा करनी है, जगह-जगह अभियान छेड़ने हैं।  समझ पैदा करने का अभियान सारी सरकारों को मनुष्यता में फैलाना होगा कि हम देशों में राष्ट्रों को अलग-अलग बांटकर नहीं रह सकते, अब हमें एक पृथ्वी, एक देश, एक मनुष्यता की बात सोचनी होगी।  अब हमें लड़ने की बात नहीं सोचनी।  जब अलग-अलग देश कि बात सोचेंगे तो मिट जायेंगे।  मनुष्यता ही मिट जायेगी और दूसरी बात मैं कहना चाहता हूँ कि अब वक्त आ गया है सारी दुनिया को सामूहिक निर्णय लेना पड़ेगा कि हम आतंकवाद के खिलाफ हैं और आतंकवाद के खिलाफ रहेंगे और सारी दुनिया को ये संकल्प लेने की जरूरत है कि आतंकवाद किसी भी धरती पर पैदा होगा तो आतंकवादी गतिविधियों को हम प्रोत्साहन नहीं देंगे।  हम सफाया करेंगे उनका, हम मिटायेंगे उनको; हर देश, हर राष्ट्र सबको सामूहिक रूप से संकल्प लेना पड़ेगा।  यह समझ पैदा करनी है कि वो आतंकवादी गतिविधि चाहे जिस देश के खिलाफ हो यदि हमारी धरती पर उसका प्रशिक्षण दिया जा रहा है, उसकी गतिविधियाँ चलायी जा रही हैं तो हम उसको ख़त्म करेंगे वो आतंकवाद भले ही हमारे दुश्मन देश के खिलाफ क्यों न हो ये समझ पैदा करनी है।  इसका आन्दोलन चलाना पड़ेगा, क्यों?  क्योंकि आदमी यदि समझदार होगा तो अपने आप आतंकवादी गतिविधियों को हतोत्साहित करेगा, मिटायेगा, नष्ट करेगा।  समझदार आदमी होगा तो वो समझेगा कि आतंकवाद का जिसने जहाँ भी प्रशिक्षण लिया या पोषण दिया आतंकवाद ने उसी को डस लिया, उसी को खा लिया है सारा इतिहास इस बात का साक्षी है कि अमेरिका और यूरोपियन देश जगह-जगह पर आतंकवाद को परिष्कृत कर रहे थे लेकिन ११ सितम्बर २००० कि घटना जो अमेरिका में घटी उसने अमेरिका और यूरोप की आँख खोल दी जिन सांपो को उन्होंने पाला-पोसा था उन्होंने उन्हें ही डस लिया, उनको ही डसने लगे।  अगर वे समझे कि आतंकवाद को अगर हम प्रोत्साहन देते हैं तो आतंकवाद एक दिन निश्चित रूप से हमें ही डस लेगा।  ये समझ पैदा करने की जरूरत है और मैं कहता हूँ कि धर्म और कुछ नहीं है सिर्फ समझ की क्रांति है अगर तुम्हारे भीतर समझ आ जाये, अगर मनुष्य के भीतर समझ आ जाये तो उसकी समस्याओं का समाधान निश्चित है – समझ ही समाधान है।  समझ के अतिरिक्त कोई समाधान नहीं है।  कोई भी चीज पाने के लिए डिज़ायर होनी चाहिए, बर्निंग डिज़ायर होनी चाहिए वैसे ही आतंकवाद को मिटाने की एक बर्निंग डिज़ायर होनी चाहिए।  मनुष्य के दिल में मनुष्य के ह्रदय में वो डिज़ायर सद्गुरु पैदा करेगा।  हम आवाज देंगे, पुकारेंगे, मेरा दावा है अगर मेरे भीतर बर्निंग डिज़ायर है कि मैं आवाज दे-दे कर दुनिया से आतंकवाद को ख़त्म कर दूंगा तो आतंकवाद मिट कर रहेगा। आतंकवाद पनप नहीं सकता है समझ पैदा होगी तो क्योंकि मनुष्य अब इतना नासमझ नहीं रह गया कि अपने पैर पर खुद कुल्हाड़ी मारेगा और मैं यही कहना चाहता हूँ कि पाकिस्तान जैसे देश भी जो आतंकवादी गतिविधियों को प्रोत्साहन देते हैं यह समझदारी बहुत जल्दी पैदा करनी पड़ेगी  कि अगर  उन्होंने इसको प्रोत्साहन देना बंद नहीं किया तो ये आतंकवादी ही पाकिस्तान के आत्मघात का कारण बन जायेंगे।  पाकिस्तान को ये खुद ही मिटा देंगे किसी दुसरे को मिटाने कि जरूरत नहीं है ये साक्षात् इतिहास प्रमाण है इस बात का।

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आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का रसायन

प्रेम के तीन तल होते हैं।  तीन अर्थों में मैं आपको समझाना चाहता हूँ।  पहला तल – शरीर का तल है जहाँ आप गिरते हो।  वासना के वशीभूत होकर परस्पर प्रेम करना वास्तव में प्रेम है ही नहीं।  वह तो स्वार्थ है, छलावा है।  एक-दूसरे की आवश्यकता की पूर्ति मात्र है।  दूसरा तल है – मन का तल, जब बात शरीर से ऊपर उठकर मन तक आ जाती है।  मन से चाहने लगते हो।  तीसरा तल है – आत्मा का तल।  सूक्ष्मतम अस्तित्व आत्मा, जब वह प्रेम एक दूसरे की आत्मा से जुड़ जाता है यानि एक दूसरे की आत्मा में बस जाते हो तब आप दो नहीं रहते एक हो जाते हो।  आत्मसात हो जाते हो परस्पर।  ऐसा निःस्वार्थ प्रेम वासना रहित होता है।  तो मेरा आपसे निवेदन है कि आप सब लोग ऐसा प्रेम करो, ऐसा प्रेम ही परमात्मा से आपका साक्षात्कार करा देगा।

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परिवर्तन

जब आपके जीवन में कोई बड़ा परिवर्तन आता है तो यह आपको दिशा परिवर्तन के लिए मजबूर करता है।  सम्भव है नया रास्ता कभी कभी आपको आसान न लगे लेकिन आप पूरी तरह निश्चिंत हो सकते हैं कि इस पथ पर आपके लिए वैभव है।  आप पूरी तरह निश्चिंत हो सकते हैं कि इस पथ पर जो भी कुछ भी प्राप्तियाँ हैं वह किसी और प्रकार से आपको अनुभव न होतीं।

जब हम भूतकाल की किसी नकारात्मक घटना की ओर देखते हैं तो हम पाते हैं कि इसने किस प्रकार हमारे जीवन को प्रभावित किया।  हम यह पाते हैं कि उस घटना ने हमें जीवन में वह दिशा दी जिसे हम किसी भी प्रकार से बदल नहीं सकते थे।

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Thought Power

The greatest discovery of our generation is that you can change your life and destiny by application of the science of thought power. Thought power is the greatest of all powers we possess.

The master secret of the ages is the marvelous, miracle making power found in the sub-conscious mind. In fact, your life becomes what you think. Great teachers down the ages have emphasized the importance of our mind and thought power. Buddha said, “The mind is everything, what you think, you become”. Ram Krishna Paramhansa, the great Indian mystic said: “By the mind one is bound, by the mind one is freed.” According to William James, the greatest discovery of our generation is that human beings can alter their life by altering their attitudes of mind. In this way, you can master your destiny by mastering your thoughts.

However, it is a matter of great misfortune that a vast majority of people don’t even know how to apply and use their thoughts – the master power of the mind. It is just as essential to know how to think correctly as it is to know how to speak or act correctly. It is even more painful to know the fact that people go to great lengths to avoid thoughts. As pointed out by Thomas Edison, “Only very few of people think, most of them think that they think but most of the people on this earth don’t even think of thinking”.

Courtesy:  ‘You Can Top ‘

डर और चिंता

क्या आप किसी चीज से डरते हैं और उस पर काबू पाना चाहते हैं? याद रखिए डर किसी भी तरह के खतरे की जीव-वैज्ञानिक प्रतिक्रिया है।  इसके लक्षण हैं तनाव, कमजोरी, पेट में खालीपन आदि। अगर खतरा ऐसे कोई लक्षण प्रकट नहीं करता है तो या तो व्यक्ति खतरे के प्रति उदासीन है या फिर “चिंतित” है लेकिन डरा हुआ नहीं।  इससे कोई कैसे निपटता है यह दो कारकों पर निर्भर है: डर की तीव्रता और व्यक्ति की आंतरिक इच्छाशक्ति।  यदि आप किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहते हैं तो ऐसी भावनाओं से आपका कभी सामना नहीं होगा।  डीप ब्रीदिंग, पावर स्लीप और महा मेधा क्रिया ये सभी डरों से बाहर निकलने में आपकी मदद करती हैं क्योंकि ये आपको स्थिति का विश्लेषण करने और जीतने के लिए उपयुक्त रणनीति विकसित करने का अवसर देती हैं।

जल्दी सीखने का अभ्यास

क्या आपने कभी ध्यान दिया है, आपके आप-पास के सफल लोग कौन सी आदतें धारण करते हैं? जिस प्रकार वे बात करते हैं, चलते हैं, अलग-अलग उम्र के लोगों से कैसे संवाद करते हैं उसकी एक सूची बनाने की कोशिश कीजिये और क्यों न उन्हीं से सलाह लें कि आपको किस तरह से व्यवहार करना चाहिये, काम करना चाहिये, अध्ययन करना चाहिये और जीना चाहिये; वे अपने रहस्यों को आपसे बांटने में प्रसन्न ही होंगे।

कुछ भी जल्दी सीखने का सबसे अच्छा तरीका है कि जो आप सीखना चाहते हैं उसका पूर्वदर्शन कीजिये। फिर यह समझने का प्रयास कीजिये कि उस विषय पर किस प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं,  यह जानने के बाद पाठ्य सामग्री और अपने नोट्स को पढ़ने का प्रयास कीजिये।  अंततः, आपने जो पढ़ा है उसका स्वयं अनुवाचन कीजिये और बीच में आप जो भूल गए हैं उसकी जाँच कीजिये।  इस अंतर को दूर करके आप एक आत्मविश्वासी शिक्षार्थी बन सकते हैं।

उद्धरण: ‘यू कैन टॉप’ पुस्तक

शक्तिशाली श्वशन (पावर ब्रीदिंग) काफी प्रभावकारी है!

अपनी एकाग्रता को बढ़ाने और तनाव स्तर को कम करने के लिये, योगी और कुशल लोग इसी प्रकार की पावर ब्रीदिंग की सलाह देते हैं।  इस सलाह के पीछे रहस्य यह है कि श्वसन आपके शरीर को प्रचुर मात्र में प्राणवायु (ऑक्सिजन) प्रदान करता है और अंततः यह प्राणवायु मस्तिष्क तक पहुँच कर इसे सक्रिय और ऊर्जावान बनाती है।  पावर ब्रीदिंग कहीं भी की जा सकती है और यह क्षात्रों के लिये सर्वोत्तन व्यायाम मानी गयी है।

पावर ब्रीदिंग के लिये, सुखपूर्वक बैठ जाइए और अपनी नासिका से धीरे-धीरे गहरी सांस लीजिये और अपने पेट को अंदर खींचते हुए सांस को बाहर निकालिये।  इस कार्य को बिना किसी जल्दबाज़ी के 10 बार करना है।

उद्धरण:  “यू कैन टॉप” पुस्तक

आस्था और आकर्षण

आस्था इतनी शक्तिशाली है कि यह घटनाओं और आपकी मनोवांछित परिस्थितियों को आपके जीवन में आकर्षित करने के लिये प्रयोग की जा सकती है।  आस्था का अभाव आपके मस्तिष्क में उन विचारों को उत्पन्न करेगा जो आपकी उन इच्छित घटनाओं जिनका कि आप आकर्षण करना चाहते हैं उनके विपरीत होगा।  उदाहरण तया, आपकी करोड़पति बनने की इच्छा हो सकती है, लेकिन आप ईमानदारी से यह विश्वास नहीं कर पाते हैं कि आप अपनी वर्तमान परिस्थितियों में इसे इतनी शीघ्रता से प्राप्त कर सकते हैं।  दृढ़ आस्था के अभाव में आपकी सभी इच्छाएं एवं लक्ष्य व्यर्थ हैं।

अपने लक्ष्य को वास्तविकता में बदलने के लिये आपको अपने भीतर प्रबल विश्वास करने की दृढ़ इच्छा शक्ति विकसित करनी होगी।  कोई भी व्यक्ति अपने आस्था तंत्र को सकारात्मक रूप से बढ़ना और दिन प्रतिदिन शक्तिशाली होना सिखा सकता है।  शुरुआत आप एक ऐसे लक्ष्य से कर सकते हैं जिस पर आपको विश्वास हो कि यह प्राप्त करना संभव है।  प्रारम्भ में शून्य से करोड़पति बनना बहुत अधिक लग सकता है, लेकिन लखपति बनने का लक्ष्य बनाना संभावना के क्षेत्र में लगता है।  आप इस लक्ष्य को प्राप्त करने में आस्था रखिये और आप देखेंगे कि किस तरह आकर्षण का नियम आपके लिये कार्य करता है।

उद्धरण: “यू कैन टॉप” पुस्तक।