दीक्षा

दीक्षा के नाम पर बहुत शोर मचा है लेकिन कोई भी दीक्षा को परिभाषित नहीं करता है। दीक्षा के नाम पर केवल दूसरों का दोहन ही होता है। शिक्षा व दीक्षा दो शब्द हैं। शिक्षा की प्रक्रिया लम्बी व धीमी होती है। जबकि दीक्षा की प्रक्रिया सूक्ष्म व सटीक होती है। यह एक विशेष ज्ञान होता है जिसका तीव्र असर होता है। किसी भी विषय का विस्तृत अध्ययन शिक्षा है। लेकिन किसी विषय का विशेष ज्ञान दीक्षा है। अर्थात जैसे कोई मेडिकल का छात्र वर्षों अध्ययन व अभ्यास के बाद चिकत्सक बन जाता है और कुछ विशेष ज्ञान या अनुभव प्राप्त कर लेता है। और फिर यह ज्ञान या अनुभव अगले किसी चिकत्सक को देता है, जोकि सूक्ष्म व तीव्र प्रभावी होगा। यही दीक्षा है। आध्यात्म में भी दीक्षा दी जाती है जो कि क्रमिक होती है अर्थात एक के बाद एक क्रम से कई दीक्षा होती है। जब साधना की पोस्ट लिखूंगा तब इसकी व्याख्या की जाएगी तथा साधना व दीक्षा का संबंध भी बताया जाएगा।

Posted on अक्टूबर 25, 2020, in आध्यात्म and tagged , . Bookmark the permalink. टिप्पणी करे.

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