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असीमित सफलता प्राप्ति के लिये आकर्षण के नियम का उपयोग

प्रत्येक सफलता और उपलब्धि के लिए स्वयं की प्राप्त करने की क्षमता पर सीमाओं का अधिरोपण ही सबसे महत्त्वपूर्ण कारण है।  वैज्ञानिकों के प्रयोगों के अनुसार, एक व्यक्ति के मसतिष्क में रोज औसतन ६०,००० विचार आते हैं।  अधिक चौंकाने वाला तथ्य यह है कि उनमें से लगभग ९५% विचार वही होते हैं जो आपके भीतर एक दिन पहले भी थे।  इस तरह से हर व्यक्ति एक सीमित विचार स्वरूप को विकसित करता है और इसी सीमित विचार स्वरूप के ढांचे में जीवन जीने की ओर अग्रसर हो जाता है।

कभी-कभी आपको हैरानी होती होगी कि आपकी आय सीमित क्यों है।  आपकी वर्तमान आय सीमित इसलिए है क्योंकि अपने अपने आप को इसी आय को अर्जित करने के लिए सीमित कर लिया है।  आप बहुत आसानी से इसका ५, १०, या २० गुणा कमा सकते थे यदि आपने अपने सीमित विचारों से, जो कि आज भी कायम है, अपने आप को बांध नहीं रखा होता।  निश्चित रूप से, नहीं, आप ऐसे लोगों को अवश्य जानते होंगे जो आपसे अधिक कमाते हैं, जबकि वे आप जैसी शिक्षा, गुण और बुद्धिमत्ता के स्वामी नहीं हैं।   इसीलिए, सीमित विचार स्वरूप को असीमित विचार स्वरूप की आदत से अवश्य बदल दिया जाना चाहिये।

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About Ajay Pratap Singh

Blogger, ERP Administrator, Certified Information Security Expert, Spiritual Healer, Translator (E2H)

Posted on जून 19, 2016, in प्रवचन. Bookmark the permalink. टिप्पणी करे.

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