प्रेम

जब आपको परिवार में प्रेम नहीं मिलता है, तो आप उसे बहार खोजते हो। उस प्रेम को पाने की ललक ही आपको दूसरे परिवारों की ओर झाँकने को विवश करती है। इसके परिणामस्वरुप समाज में व्यभिचार, तरह-तरह की कुरीतियाँ पैदा हो जाती हैं। यह जो कुछ भी हमारे समाज में पैदा हो रहा है उसके लिये जिम्मेदार हैं – हम और हमारा परिवार क्योंकि हमारे परिवारों में प्रेम नहीं है। तो उसकी तृप्ति के लिये पीछे के रास्ते से दूसरे द्वार निर्मित होते हैं। इसीलिए समाज ने अपने स्वार्थ के लिये घोषित कर दिया कि तुम वेश्या का काम करो। जो अतृप्त आये तुम्हारे पास उसे तुम स्वीकार करो। मनु से लेकर उनके बाद के नीतिकारों ने वेश्या की संस्था को जिन्दा रखा। लेकिन इस व्यवस्था को बनाते समय यह ध्यान नहीं दिया गया कि क्यों न प्रेम के अंकुर को ही परिवारों में उगाया जाए। इसीलिए मैं जिस आध्यात्म की बात करना चाहता हूँ, वह इतना ही है कि आपके परिवार में, आपके ह्रदय में प्रेम के फूल खिलें और आपके चेहरे पर मुस्कान बिखरे।

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About अजय प्रताप सिंह

Light Worker

Posted on सितम्बर 10, 2013, in प्रेम. Bookmark the permalink. टिप्पणी करे.

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