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आनंदमय जीवन चमत्कार कर सकता है

आनंदमय जीवन मस्तिष्क की असीमित क्षमता को उन्मुक्त करने का अकेला सबसे अधिक फलप्रद कारक है।  वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि जब व्यक्ति आनंदमय स्थिति में होता है तो उसके जनन-केंद्र से मस्तिष्क की ओर ऊर्जा का प्रवाह होता है परंतु जब व्यक्ति दुःखी या विषादपूर्ण होता है तब मस्तिष्क से आधार चक्र तक अधोवर्ती प्रवाह होता है। इसलिए, अपनी मस्तिष्क क्षमता का अत्यधिक रचनात्मक और उत्पादक उपयोग करने के लिए आनंदमय जीवन जीने का अभ्यास कीजिये।  आप इसे निम्नवत  विधि से कर सकते हैं:

  1. आधुनिक जीवन की व्यस्त जीवन शैली में हम आनंदमय जीवन जीने का सिद्धान्त भूल चुके हैं। आखिरकार, यह कड़ी मेहनत किसलिए है?  आप इस बात का उत्तर एक लाभकारी आजीविका जो कि  सांसारिक धन और परिवार के लिए आराम से भरा हुआ हो, में पा सकते हैं।  कुछ की नज़रों में भविष्य की सुरक्षा भी हो सकता है।  लेकिन फिर इन सब प्रयासों का लक्ष्य क्या है – उत्तर है आनंद और प्रसन्नता से भरा हुआ जीवन।  इसलिए, मैं कहता हूँ कि ऐसा जीवन आप अभी तुरंत शुरू कर सकते हैं।  और मैं ज़ोर देकर कहता हूँ कि आपके लक्ष्यों की प्राप्ति का पूरा मार्ग आसान हो जाएगा, यदि आप आनंदमय जीवन जीना शुरू कर दें।  अशर्त प्रसन्नता का अभ्यास ही आनंदमय जीवन जीने का एकमात्र उपाय है।
  2. आप कितनी बार रोज़मर्रा की छोटी-छोटी समस्याओं से परेशान हो जाते हैं? और फ़िर, कुछ दिन बीतते हैं और आप उन समस्याओं को करीब-करीब भूल जाते हैं, जबकि उस समय उन समस्याओं ने आपके आस-पास नर्क पैदा कर दिया होगा।

जीवन की कल्पना एक बड़ी पेंटिंग के रूप में कीजिये।  इसके विराट रूप को देखिये और आप इस अद्भुत उपहार के किए ईश्वर का धन्यवाद करेंगे।  समस्या यह है कि आप इस पेंटिंग के बहुत पास खड़े हैं।  इसलिए समस्याएँ आपको बढ़ी हुई दिखती हैं ठीक वैसे है जैसे सांसारिक उपलब्धियां आपको अत्यधिक प्रसन्नता देती हैं।  मैं कहूँगा एक कदम पीछे जाइए और इस बड़ी तस्वीर को देखिये तो ये समस्याएँ और उपलब्धियां आपको बहुत छोटी और नगण्य (क्षुद्र) लगेंगी।  आप युवा हैं और आपको नहीं पता है कि आपके भावी जीवन में कौन सी चुनौतियाँ आने वाली हैं।  इसलिए आनंद की आध्यात्मिक स्थिति में जीना सीखिये।  यह आपको आपकी कल्पनाओं से भी ऊंची स्थिति में ले जाएगा।

  1. मस्तिष्क की असीमित शक्ति को उन्मुक्त करने के लिए अशर्त प्रसन्नता का अभ्यास कीजिये। और, अपनी प्रसन्नता की मात्रा को बढ़ाते रहने के लिए एकमात्र उपाय है अपनी उपलब्धियों की गणना करते रहना।  यद्यपि यह मूर्खतापूर्ण लग सकता है परंतु जिनके प्रति (घटना या व्यक्ति) आप आभारी हैं उनकी एक सूची बनाना सदा लाभकारी होता है।  इस सूची (लिस्ट) की लंबाई देखकर आपको स्वयं आश्चर्य होगा।  प्रतिदिन हर सकारात्मक अनुभव को लिखने और इसे
    याद रखने का प्रयास कीजिये।
  2. हर क्षण की सुंदरता को कैद कर लीजिये और इसके आनंददायक पहलू का आनंद लीजिये। अपने आस-पास की सुंदरता की सराहना कीजिए, महान क्षणों को बचाकर रखिए।  और अपने आस-पास की वस्तुओं के प्रति सकारात्मक रहिए।
  3. ग्लास को आधा खाली नहीं अपितु आधा भरा हुआ देखने को महत्त्व दीजिये।
  4. अच्छे कर्म करना अचूक प्रसन्नतादायक है। इसलिये अच्छे कार्यों के लिये समय या धन या दोनों दीजिये।  ‘देने का आनंद’ का उदघाटन और दूसरों की खुशी में अपनी शांति पाईये।
  5. यदि आप और अधिक प्रसन्न होना चाहते हैं तो वह काम अधिक कीजिये जो आपको प्रसन्नता देते हैं। दस ऐसे कामों की सूची बनाइये जो आपके हृदय को प्रसन्नता से भर देते हैं।  और फिर इन लक्ष्यों का अपने जीवन में अंतःक्षेप (इंजेक्ट) कीजिये।  इसका विशेष ध्यान रहे कि आपने जो सूची बनायी है उस पर अमल भी करें अन्यथा यह सिर्फ एक सिद्धान्त (कान्सैप्ट) ही रह जाएगा।
  6. जब तक मरने का समय नहीं आ जाता तब तक अधिकांश लोग जीवन जीने की कला की खोज ही नहीं करते। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।  इसलिये महा मेधा क्रिया का अभ्यास आज से ही प्रारम्भ कीजिये जो कि आनंदमय जीवन जीने के गुप्त रहस्यों को खोल देगा और आप को परम आनंद की ओर ले जायेगा।
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