झूठे धर्मों को विदा करो

हमें यह समझ पैदा करनी होगी कि पहले हम मनुष्य हैं और धर्म के नाम पर अंधी धार्मिकता, ये धार्मिकता नहीं है यह धोखा है इसलिए आज मैं यह सन्देश देना चाहता हूँ कि “झूठे धर्मों को विदा करो”।  अब वो समय आ गया है अब मनुष्य ज्यादा समझदार हो गया है।  अब मनुष्य को धर्म के नाम पर नासमझी करने के लिए विवश नहीं किया जा सकता।  मैं कहना चाहता हूँ कि सब धर्मों को विदा करो ।  ये धर्म तुम्हारे लिए दुःख, संताप, पीड़ा और व्यथा का कारण बन रहे हैं।  पिछले ५००० सालों में १५००० युद्ध हुए हैं और वे सब धर्म के नाम पर लड़े गये हैं।  करोड़ों – अरबों लोगों का खून बहाया गया है।  जितना धर्म के नाम पर खून बहाया गया है उतना आज तक किसी भी प्रकार की दुर्घटना में नहीं बहा और आतंकवाद आज हर देश की घटना है जो कोई भगवान के नाम पर कर रहा है, कोई ईश्वर के नाम पर कर रहा है, कोई अल्लाह के नाम पर कर रहा है और एक-दूसरे को काटते जा रहे हैं।  मैं कहना चाहता हूँ इस आतंकवाद की जड़ है इस दुनिया में अणु शस्त्रों का उपलब्ध हो जाना।  जब से आणविक शस्त्रों के होते हुए दूसरे हथियारों का प्रयोग युद्ध में नहीं किया जा सकता वे सब बेकार हो गये तो उनके सामने एक ही विकल्प था या तो उन पुराने हथियरों को सागर में डुबो दिया जाये या उन्हें सस्ते दामों पर गरीब देशों को बेच दिया और उसका नतीजा क्या हुआ एक बहुत बड़ी भूल हुई वो हथियार गरीब देशों ने ले लिये लेकिन वो गरीब देश ज्यादा शक्तिशाली हो गये।  आज आतंकवादी बड़े आलीशान ढंग से व्हाईट हाउस पर, पार्लियामेंट पर, वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर पर बम फेंक देता है आपके सौन्दर्य की प्रतीक इमारतों पर बम फेंक देता है।  आपके पास आणविक शस्त्र हैं लेकिन कितनी विचित्र बात है कि अब हमारे लिये वे शस्त्र बेकार हैं आप उस आणविक शस्त्र का प्रयोग नहीं कर सकते हो उनके खिलाफ क्योंकि आपके पास अणु की विराट शक्ति है और उस विराट शक्ति का उपयोग इस छोटे काम के लिये नहीं कर सकते अगर उस छूते काम के लिये इस शक्ति का प्रयोग किया तो सारा देश ही नष्ट हो जायेगा सारी दुनिया ही नष्ट हो जायेगी इसलिए आप विवश हैं आप अणु शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकते हैं आतंकवाद का मुकाबला करने के लिये।  आतंकवाद तो पनपता जायेगा, बढ़ता जायेगा।  बसों में होगा आप बसों में जा रहे हैं एकाएक विस्फोट हो जायेगा।  आप कार में जा रहे हैं विस्फोट हो जायेगा।  आप बैठे हैं बम फूट जायेंगे।  गोलियां चल जायेंगी इसका समाधान प्रशासन नहीं कर सकता है इसके समाधान का उपाय क्या है इसके समाधान का उपाय केवल सद्गुरु के हाथों में है।  सदगुरुओं को सुनना पड़ेगा।  सदगुरुओं के समझना पड़ेगा क्योंकि सद्गुरु राजनीति कि भाषा नहीं बोलता सद्गुरु के प्राणों में गहराई से जो सत्य उमड़ता है वह सत्य सद्गुरु के मुख से निकला है उस सत्य कि समझ अगर पैदा हो जाये तो नयी मनुष्यता पृथ्वी पर पैदा हो सकती है,  एक नया मनुष्य पृथ्वी पर जन्म ले सकता है और मैं आपसे कहना चाहता हूँ साई-डिवाइन फाउंडेशन का एक ही उद्देश्य है मैं पृथ्वी पर हँसता हुआ जीवन आज देना चाहता हूँ, हँसता हुआ जीवन।  आदमी उदास है, निराश है, मरा-मराया मुरझाया हुआ जैसे जिन्दा ही नहीं है सरक-सरक कर जी रहा है केंचुए कि तरह जी रहा है मैं उसको जीवंत करना चाहता हूँ “मैं तुम्हें धर्म नहीं जीवन देना चाहता हूँ” अगर तुम्हें जीवन मिल जाये तो परमात्मा तुम्हारे इर्द-गिर्द नृत्य करता रहेगा।  साक्षात् परमात्मा नृत्य करेगा, तुम्हे जीवन चाहिये।  “सर्च लाइफ नॉट रेलिजन”।  छोड़ें धर्मों को, किसी धर्म कि जरूरत नहीं है, सब धर्म बेकार हो गये हैं व्यर्थ के हो गये हैं, दो कौड़ी के हो गये हैं।  झूठे हो गये हैं, निरर्थक हो गये हैं, सब धर्मों को विदा करो और जब तुम धर्मों को विदा करोगे तो उसका एक अवश्यम्भावी परिणाम होगा तुम्हारी अंतर्यात्रा शुरू होगी, तुम्हारे भीतर से एक धर्म अपने आप पैदा होना शुरू हो जायेगा।  तुम शांति को खोजोगे।  शांति की खोज सच्चे धर्म को पैदा करती है, साक्षात् परमात्मा को पैदा करती है, तुम उसे खोज में  लोगे जब तुम नकली धर्मों को विदा कर दोगे – पहली बात। दूसरी बात – आतंकवाद का मुकाबला करने के लिये एक समझ पैदा किये जाने की जरूरत है दुनिया के कोने-कोने में कि अब नहीं जीया जा सकता है।  “नाउ द होल वर्ल्ड हैज बिकम अ ग्लोबल विलेज”।

आज सारा संसार एक गाँव कि तरह हो गया है आज यहाँ बात करो सारी दुनिया में पहुँचती है।  आज आपके पास अणु शस्त्र है अगर आप मिटकर रहोगे, विभाजित रहोगे तो लड़ोगे और लड़ोगे तो निश्चित रूप से युद्ध संभव होगा।  अब अगर युद्ध होगा तो केवल एक देश नहीं मिटेगा, फिर सारी दुनिया मिट जायेगी; इसलिए मैं कहता हूँ कि अब तीसरा विश्व युद्ध असंभव हो गया है तीसरा विश्व युद्ध हो ही नहीं सकता।  अब सिर्फ आतंकवाद ही पनपेगा, बढेगा।  अगर इसको जड़ से मिटाने कि कोशिश नहीं कि गयी तो पहले समझ पैदा करनी है, जगह-जगह अभियान छेड़ने हैं।  समझ पैदा करने का अभियान सारी सरकारों को मनुष्यता में फैलाना होगा कि हम देशों में राष्ट्रों को अलग-अलग बांटकर नहीं रह सकते, अब हमें एक पृथ्वी, एक देश, एक मनुष्यता कि बात सोचनी होगी।  अब हमें लड़ने कि बात नहीं सोचनी।  जब अलग-अलग देश कि बात सोचेंगे तो मिट जायेंगे।  मनुष्यता ही मिट जायेगी और दूसरी बात मैं कहना चाहता हूँ कि अब वक्त आ गया है सारी दुनिया को सामूहिक निर्णय लेना पड़ेगा कि हम आतंकवाद के खिलाफ हैं और आतंकवाद के खिलाफ रहेंगे और सारी दुनिया को ये संकल्प लेने कि जरूरत है कि आतंकवाद किसी भी धरती पर पैदा होगा तो आतंकवादी गतिविधियों को हम प्रोत्साहन नहीं देंगे।  हम सफाया करेंगे उनका, हम मिटायेंगे उनको; हर देश, हर राष्ट्र सबको सामूहिक रूप से संकल्प लेना पड़ेगा।  यह समझ पैदा करनी है कि वो आतंकवादी गतिविधि चाहे जिस देश के खिलाफ हो यदि हमारी धरती पर उसका प्रशिक्षण दिया जा रहा है, उसकी गतिविधियाँ चलायी जा रही हैं तो हम उसको ख़त्म करेंगे वो आतंकवाद भले ही हमारे दुश्मन देश के खिलाफ क्यों न हो ये समझ पैदा करनी है।  इसका आन्दोलन चलाना पड़ेगा, क्यों?  क्योंकि आदमी यदि समझदार होगा तो अपने आप आतंकवादी गतिविधियों को हतोत्साहित करेगा, मिटायेगा, नष्ट करेगा।  समझदार आदमी होगा तो वो समझेगा कि आतंकवाद का जिसने जहाँ भी प्रशिक्षण लिया या पोषण दिया आतंकवाद ने उसी को डस लिया, उसी को खा लिया है सारा इतिहास इस बात का साक्षी है कि अमेरिका और यूरोपियन देश जगह-जगह पर आतंकवाद को परिष्कृत कर रहे थे लेकिन ११ सितम्बर २००० कि घटना जो अमेरिका में घटी उसने अमेरिका और यूरोप की आँख खोल दी जिन सांपो को उन्होंने पाला-पोसा था उन्होंने उन्हें ही डस लिया, उनको ही डसने लगे।  अगर वे समझे कि आतंकवाद को अगर हम प्रोत्साहन देते हैं तो आतंकवाद एक दिन निश्चित रूप से हमें ही डस लेगा।  ये समझ पैदा करने की जरूरत है और मैं कहता हूँ कि धर्म और कुछ नहीं है सिर्फ समझ कि क्रांति है अगर तुम्हारे भीतर समझ आ जाये, अगर मनुष्य के भीतर समझ आ जाये तो उसकी समस्याओं का समाधान निश्चित है – समझ ही समाधान है।  समझ के अतिरिक्त कोई समाधान नहीं है जैसे रोहताश ने कहा कि कोई भी चीज पाने के लिए डिज़ायर होनी चाहिए, बर्निंग डिज़ायर होनी चाहिए वैसे ही आतंकवाद को मिटने कि एक बर्निंग डिज़ायर होनी चाहिए।  मनुष्य के दिल में मनुष्य के ह्रदय में वो डिज़ायर सद्गुरु पैदा करेगा।  हम आवाज देंगे, पुकारेंगे, मेरा दावा है अगर मेरे भीतर बर्निंग डिज़ायर है कि मैं आवाज दे-दे कर दुनिया से आतंकवाद को ख़त्म कर दूंगा तो आतंकवाद मिट कर रहेगा। आतंकवाद पनप नहीं सकता है समझ पैदा होगी तो क्योंकि मनुष्य अब इतना नासमझ नहीं रह गया कि अपने पैर पर खुद कुल्हाड़ी मारेगा और मैं यही कहना चाहता हूँ कि पाकिस्तान जैसे देश भी जो आतंकवादी गतिविधियों को प्रोत्साहन देते हैं यह समझदारी बहुत जल्दी पैदा करनी पड़ेगी  कि अगर  उन्होंने इसको प्रोत्साहन देना बंद नहीं किया तो ये आतंकवादी ही पाकिस्तान के आत्मघात का कारन बन जायेंगे।  पाकिस्तान को ये खुद ही मिटा देंगे किसी दुसरे को मिटाने कि जरूरत नहीं है ये साक्षात् इतिहास प्रमाण है इस बात का।

  1. सर्वोत्तम साइड के लिए साधुवाद
    जय जय

  1. पिंगबैक: समझ ही समाधान है | साइंस ऑफ़ डिवाइन लिविंग

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