प्रेम – विवाह और हमारी धार्मिकता

प्रेम एक चिंगारी है

महावीर, क्राइस्ट और मोहम्मद पैदा हुए होंगे ऐसे माँ-बाप से , भगवान् कृष्ण और भगवान् राम ने जन्म लिया होगा, उन क्षणों में जब उनके माँ और बाप ने अपने चरम पलों के क्षणों में आत्मिक सहयोग से, अपने मिलन से इन बच्चों को जन्म दिया होगा तभी उनके जीवन में परमात्मा की सुगंध और परमात्मा की फुहार आ सकी और मैं इतना जरूर कहूँगा की अगर प्रेम पैदा हो जाये आपके जीवन में तो दुनिया की कोई ताकत आपको दुखी कर ही नहीं सकती है।  दुनिया की कोई ताकत आपके जीवन में, आपके परिवार में तनाव पैदा ही नहीं कर सकती है।  प्रेम तो एक अद्भुत चिंगारी है, जो आपके जीवन में इतनी बड़ी क्रांति पैदा कर सकती है कि आपका पूरा जीवन आनंद से भरना शुरू हो जायेगा।  और यह बहुत मुश्किल नहीं है।  केवल अभ्यास साध्य है, थोडा सा अभ्यास करने की जरूरत है।  अगर थोड़ा सा भी अभ्यास करने को आप तैयार नहीं होंगे, एक कदम रखने को भी तैयार नहीं होंगे, तो मैं कौन हूँ, ब्रम्हा, विष्णु और महेश साक्षात् परमात्मा भी आपको दुनिया में कुछ नहीं दे सकते हैं।  अगर कुछ प्राप्त करना है, तो मैं हमेशा कहता हूँ कि एक कदम तो आपको रखना ही होगा और एक कदम की सामर्थ्य सबकी है चाहे वह कितना भी कमजोर क्यों न हो और इस बिगड़ते हुए परिवार की , इस बिगड़ते हुए जीवन की दुर्दशा को बचाना ही आपका उत्तरदायित्त्व है।

प्रेम की शून्यता समस्त प्रकार के अपराधों का मूल है।  जितने आपके जीवन में, दुनिया में युद्ध हुए है, इन सबका मूल कारण प्रेम का आभाव ही है।  पहले विश्व युद्ध में लगभग साढ़े तीन करोड़ लोग मारे गए थे, दूसरे विश्व युद्ध में लगभग साढ़े सात करोड़ लोग मारे गए थे।  किसी ने आइन्स्टीन से पूछा कि तीसरे विश्व युद्ध में कितने लोग मरेंगे, तब आइन्स्टीन ने एक बात कही थी कि तीसरे विश्व युद्ध की तो मैं नहीं जानता पर चौथे विश्व युद्ध के बारे में बता सकता हूँ।  चौथे विश्व युद्ध के बारे में आइन्स्टीन ने कहा कि चौथा विश्व युद्ध जब लड़ा जायेगा तब मनुष्य के पास लड़ने के लिये हथियार ही नहीं होंगे यानि तीसरे विश्व युद्ध में सबकुछ विध्वंश हो चुका होगा।  श्रृष्टि अगर तीसरे विश्व युद्ध की ओर जाती है, तो श्रृष्टि का जीवन संभव नहीं है। एक ही उद्धार करने वाला तथ्य है, जिससे इस महाविनाश को रोका जा सकता है और वह है प्रेम।  मैं तो चाहता हूँ कि सम्पूर्ण धार्मिक चेतना प्रेम पर आधारित हो और सम्पूर्ण विश्व में प्रेम के ही मंदिर बनें और प्रेम का ही धर्म विकसित हो और उस प्रेम के धर्म के एक-एक व्यक्ति पुजारी बनें।  जब आप प्रेम के पुजारी बनने लगेंगे तो फिर कोई दूसरी चीज है ही नहीं जिससे आप वंचित हो जाएँ।

महिलाएं तो साक्षात् प्रेम ही हैं, प्रेम का ही दूसरा नाम है स्त्री और उनकी बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, स्त्री प्रेम के अलावा कुछ है ही नहीं।  इनका सम्पूर्ण व्यक्तित्व ही प्रेम है।  पुरुष प्रेम प्लस समथिंग मोर, पुरुष लेके तो प्रेम के अलावा कुछ और आयाम भी होते हैं लेकिन स्त्री तो सम्पूर्ण प्रेम ही है।  इसीलिए मेरी माताओं, मेरी बहनों आपके ऊपर बहुत बड़ा उत्तरदायित्व है कि अपने घर के आँगन में प्रेम के बीज बोएं और प्रेम के आनंद से पूरे परिवार को, पूरे घर को भर दें।  प्रेम के अलावा कुछ दूसरा तथ्य नहीं है, जो आपको भौतिक उपलब्धियों को दे सके और इससे बड़ा कोई और साधन नहीं जो आपको परमात्मा की ओर ले जा सके।  कुछ बुजुर्ग भले ही मेरी बात से असंतुष्ट हो सकते हैं शायद वह सोचते हों कि प्रेम खतरनाक चीज है।

मैं उनसे, आप सबसे इतना ही कहना चाहता हूँ कि अनुभवहीन लोगों से थोड़ा सावधान रहना चाहिए।  क्योंकि वे लोग जिंदगी में कोई नया रास्ता बनने ही नहीं देते।  खासकर के जिनकी बात मैंने शुरू की थी – पंडितजी, पुजारीजी जैसे बिना अनुभव के लोगों से और मैं चाहता हूँ – आप मनुष्य हो, आपके अन्दर ह्रदय है और आपके शरीर में रक्त है।  आप नए रास्ते का अनुभव करके देखो, जरा सा प्रेम के बीज बोकर उसको अंकुरित करके आप देखिये तो कितना क्रन्तिकारी परिवर्तन शुरू हो जायेगा आपके जीवन में।

अनाथालय खोलने के लिये एक महिला मेरे पास आयी थी, संत जी को लेकर कि हम अनाथालय खोल रहे हैं।  मैंने उनसे कहा कि आप इस अनाथालय को खोलने के बजे अगर एक सन्देश ही घर घर जाकर दें कि हर घर आज अनाथालय हो रहा है क्योंकि बच्चों के जीवन में प्रेम तो आप बरसा ही नहीं रहे हो।  आप अपने बच्चों का कितना लालन-पालन करते हो, कितना प्यार देते हो, क्या कभी प्यार कि किलकारी सुनी है? पतियों! मैं आपसे पूछ रहा हूँ, आप घर से दफ्तर निकल जाते हो, जब आते हो तो बच्चे सोये होते हैं, और जब घर से निकले हो तब बच्चे सोये रहते हैं।  बच्चे ऐसे ही बढ़ते-बढ़ते पंद्रह-बीस साल के हो जाते हैं।  बेटियों कि शादी हो जाती है।  बच्चे आजकल अमेरिका, लन्दन पढने चले जाते हैं, कभी-कभी पूरी कौम बर्बाद हो जाती है।  ऐसे न जाने कितने परिवार हमने देखे हैं।  ये बच्चे अनाथ ही तो हैं, अनाथ ही बढ़े और अनाथ ही रह गये।  तो अपने घरों को अनाथालय होने से बचाएं।  ये तभी संभव है जब आप अपने ह्रदय में प्रेम भरते चले जाएँ।

  1. gurudev pranam
    i have some questions in my mind
    first of all research studies show that arrange marriages are more stable then love marriages.i agree with you that in arrange marriages there is a cycle of fighting.but now love marriages has started a new culture of murder too.
    secondly in usa or uk mostly love marriages takes place there more than 40%families are single parent family which was also one of the major reason for decay in their economy but in india condition is reverse.our traditional practices(not all)have saved our economy.
    thirdly i read a column of dr.subramanium swamy i hope you must be knowing him .he claims that hinduism doesn’t mean a religion as you talk of bandhan mukt jeevan hinduism is the same either i can meditate or can go for murti puja no boundation at all even not in any field some are their but they too are on scientific bases and if some body finds a better scientific argument against them no need to follow what are your views on it
    sorry for cross questioning but its my right too

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s