Advertisements

आलोचना मत कीजिये

स्वर्ग और नरक कोई भौगोलिक दशाएं नहीं होती हैं।  अगर एक भी शत्रु तुमने पैदा कर लिया, तो समझो तुमने अपने लिए पकड़ बनाना शुरू कर दिया।  शत्रु पैदा करने का सबसे आसान तरीका है आलोचना कर दीजिये ।  इससे आसान और कोई तरीका नहीं है।

किसी की आलोचना करके तुम उसकी गलती मनवाने के लिए राजी नहीं कर सकते।  चाहे कितनी भी बड़ी भूल उसने की हो।  तुम उसकी बुराई और आलोचना करके उस गलती को मनवा नहीं सकते हो।  दोष स्वीकार नहीं करा सकते हो।  तुम जितनी उसकी आलोचना करोगे वह व्यक्ति अपने को सही साबित करने का प्रयास उतने ही जोर से करेगा, जितने कि जोर से तुम उसकी आलोचना करोगे।  वह तुम्हें ही गलत सिद्ध करेगा।  वही व्यक्ति तरह-तरह के नरक पैदा करके, तुम्हारी ऊर्जा को नष्ट करेगा।  तुम्हें पता नहीं चलता है, लेकिन अपनी इस वृत्ति के कारण तुम नाहक नाना प्रकार की परेशानियों में उलझते जाते हो।

यूनाइटेड स्टेट ऑफ़ अमेरिका का एक बहुत बड़ा अपराधी था जिसने जीवन में अनगिनत हत्याएं की थी।  उसका नाम था क्रोलेट। लोग उसको उसकी क्रूरता के कारण दो नाली बन्दूक कहा करते थे।  कहते हैं कि वह पंख फड़कते ही हत्या कर दिया करता था।  एक बार वह कार से रेलवे क्रोसिंग पार कर रहा था, कार की गति धीमी थी।  पुलिस कोंस्टेबल ने उससे पूछा – तुम्हारा ड्राइविंग लाइसेन्स कहाँ है?  उसने बड़ी-बड़ी आँखों से घूरकर उसे देखा, रिवाल्वर निकाली और गोलियों से उस सिपाही का सर छलनी कर दिया।  एक दिन जब वह अपनी प्रेमिका के घर गया था पुलिस ने 150 सिपाहियों के साथ उसकी प्रेमिका के घर की नाकेबंदी कर ली।  छत में छेद करके उस घर में आँसू गैस भी छोड़ी गयी जिससे वह समर्पण कर दे, लेकिन वह व्यक्ति कुर्सी के पीछे छिपकर गोलियां चलता रहा। उसने कागज पर अपनी प्रेमिका को बड़े ही महत्त्वपूर्ण शब्द लिखे।  मेरी प्रिये, मेरी कोट के नीचे शांत यानि थका हुआ किन्तु अत्यंत दयालु ह्रदय है, जो किसी को चोट नहीं पहुँचाना चाहता।  जब अमेरिका की अदालत ने उसे प्राणदंड की सजा दी तो उस व्यक्ति ने कहा कि मैंने आत्म-रक्षा के लिए गोलियां चलाई।  अमेरिका की अदालत और अमेरिका की जनता उसकी सही बात समझ नहीं पाई।  इस कारण से अदालत ने उसे फांसी की सजा दी।  यानि वह आदमी भी अपने को गलत मानने को तैयार नहीं था और हजारों लाखों अपराधी दुनिया में ऐसे हैं, जो अपने को जनता का हितैषी घोषित करते हैं कई डाकू गरीबों की बेटियों का ब्याह कराते हैं, क्यों? क्योंकि वह स्वयं को सही मानते हैं।  मनोवैज्ञानिकों ने दुनिया की महत्त्वपूर्ण जेलों के कैदियों के इण्टरव्यू लिये। उनका निष्कर्ष है की सभी अपराधियों ने अपने को दुर्जन व्यक्ति मानने से इंकार किया।  वह अपने को दोषी नहीं मानते।  वह कहते हैं की मेरी असलियत को समझने वाले लोग नहीं हैं यानि बड़े से बड़ा अपराधी अपने अपराध मानने को ह्रदय से तैयार नहीं है।  हम और आप तो सामान्य लोग हैं, फिर हम कैसे अपना दोष आसानी से मान सकते हैं।

यह स्वभाव है, लेकिन आप कहते हो कि सच्ची बात कहना मेरी मजबूरी है।  आप में से बहुत से प्रेमी मिलते हैं, जिन्हें मैं समझाता हूँ।  क्यों तुम्हारे मन से दूसरों के लिए ऐसे शब्द निकलते हैं? वह कहते हैं, गुरु जी, सच्ची बात तो कहनी ही पड़ेगी।  ऐसी सच्ची बात आप मत कहिए जिसमें किसी दूसरे की आलोचना हो और जिससे दूसरे व्यक्ति के ह्रदय को चोट पहुँचती हो।  अगर कोई दूसरा व्यक्ति तुम्हारी आलोचना करता है तब तुम्हें कितनी पीड़ा होती है?  यहाँ तक कि मैं भी कहता हूँ, तब तुम यही कहते हो – गुरूजी, आप अकेले में कह दीजियेगा।

भगवान महावीर कहते हैं कि सबसे बड़ी हिंसा है – दूसरों की आलोचना करना क्योंकि उससे दूसरे के ह्रदय पर चोट पहुँचती है। वह तिलमिला जाता है। थप्पड़ मरने से उतनी चोट नहीं पहुँचती है, जितनी चोट ह्रदय पर आलोचना करने से पहुँचती है।

जर्मन देश की सेना में एक नियम है की घटना घटित होने के अड़तालिस घंटे के बाद ही आप शिकायत कर सकते हैं।  इसका परिणाम यह हुआ कि अड़तालिस घंटे का समय बीतते – बीतते नब्बे प्रतिशत शिकायतें जो हो सकती थीं, वह गायब हो जाती हैं।  जर्मन की सेना में जो नियम है, वही नियम नागरिक जीवन में भी देश की सरकार द्वारा लागू कर देना चाहिए।  जैसे जो मां – बाप बच्चों को प्रताड़ित करते रहते हैं, उनमें हीन भावना भरते रहते हैं, उनके लिए ऐसा कानून बनाया जाना चाहिए कि ऐसे मां – बाप को भी सजा मिले।  बड़े संकल्प न लें, छोटे-छोटे संकल्प को आसानी से निभा सकते हैं।  धीरे – धीरे अंपने संकल्प की अवधि को बढाइये, धीरे-धीरे चौबीस घंटे शांति और आनंद से जीने की शैली आपके जीवन का अंग बन जायेगी।  दूसरों की आलोचना मत कीजिये, चाहे कैसी भी मजबूरी हो, आलोचना के शब्द बदल दीजिये।  जब भी आपका किसी की आलोचना करने का मन हो तो मेरे ये शब्द याद कर लीजियेगा।

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s